कोलकाता रेप केस डेफिनेटली कोई
लूप होल्स मिले हैं जिससे यह क्लियर है कि संजय रॉय अकेला मुजरिम नहीं है, जैसा हमें बताने की कोशिश की जा रही है। इस क्राइम में और भी लोग शामिल हैं जिन्हें शायद बचाने की कोशिश की जा रही है।
कुछ लोग ये कह रहे हैं कि हॉस्पिटल इस मुद्दे को दबाने की कोशिश कर रहा है
क्योंकि केस के बस 5 दिन बाद क्राइम सीन से 20 मीटर दूर कंस्ट्रक्शन चालू करवा दिया गया है।
वर्क दैट बिगन आफ्टर द इंसिडेंट एट एन एरिया जस्ट फ्यू फीट अवे फ्रॉम द सेमिनार रूम
वेयर द डॉक्टर's बॉडी वाज फाउंड ऑन फ्राइडे मॉर्निंग। आमतौर पे तो क्राइम सीन को
पूरी तरह से सील कर दिया जाता है।
तो कुछ कह रहे हैं कि क्योंकि संजय रॉय कोई पॉलिटिकल पार्टी का मेंबर है, इसी वजह से इस
मामले को दबाने की कोशिश की जा रही है। इसीलिए आज मैं बंगाल की सरकार और वहां
की पुलिस से सात सवाल करना चाहती हूं। सात ऐसे सवाल जो ये क्लियर कर देंगे कि
इस केस में कुछ मेजर टैंपरिंग ऑफ एविडेंसेस हुए हैं।
चलो इसे समझने के लिए हमें कहानी को शुरू से टाइम बाय टाइम समझना होगा।
9 अगस्त को कोलकाता के आर.जी. कर गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल में एक 31 साल की पीजी डॉक्टर का हॉस्पिटल के सेमिनार रूम में रेप करके मर्डर कर दिया गया। विक्टिम की हालत ऐसी थी कि शी वाज फाउंड ब्लीडिंग फ्रॉम हर आइज, माउथ एंड हर प्राइवेट पार्ट्स, वो भी बिना किसी कपड़ों के।
हादसे की रात उस डॉक्टर की 36 घंटे की ड्यूटी लगी हुई थी, जिसमें बेसिकली डॉक्टर्स को कंटीन्यूअस डे एंड नाइट इमरजेंसी और पेशेंट केयर के लिए हॉस्पिटल में ही रहना पड़ता है। यानी 36 घंटे तक कंप्लीट हॉस्पिटल में ही रहना पड़ता है। वहां पे खाना, पीना, नहाना, फ्रेश होना सब कुछ उन्हें हॉस्पिटल में ही करना होता है।
उस रात भी 24 घंटे काम करने के बाद विक्टिम और उनकी चार कलीग्स खाना खाने के लिए सेमिनार हॉल में आए थे, जहां वो लोग नीरज चोपड़ा का मैच देख रहे थे। रात के 3:00 बज चुके थे और उन सब का डिनर होने के बाद चारों कलीग्स अपनी ड्यूटी पे वापस चले गए। लेकिन विक्टिम डॉक्टर हेक्टिक ड्यूटी के बाद थोड़ा सा आराम करना चाहती थीं, इसीलिए वो वहीं सेमिनार हॉल में थोड़ी देर के लिए सो गईं।
इसके बाद रिपोर्ट्स के हिसाब से करीब सुबह के 4:00 बजे एक्यूज्ड यानी कि संजय रॉय ने रूम में एंट्री ली, जिसने उस डॉक्टर का रेप किया, उन्हें फिजिकली असॉल्ट किया और इसी दौरान, यानी कि रात 3:00 से 5:00 बजे के बीच, उनकी डेथ भी हो गई।
फिर करीब 7:30 बजे विक्टिम की बॉडी को डिस्कवर किया गया। बट बॉडी को सबसे पहले किसने देखा, इसके बारे में अब तक कोई भी न्यूज़ बाहर नहीं आई है।
अब विक्टिम की बॉडी 7:30 बजे सेमिनार हॉल में मिली, लेकिन उनके पेरेंट्स को कब इन्फॉर्म किया गया? इसके तीन घंटे बाद, सुबह के 10:30 बजे। और इसके बाद भी जब पेरेंट्स वहां पहुंचे, तो उन्हें सेमिनार हॉल के बाहर 3 घंटे तक वेट कराया गया। उन्हें अपनी बेटी की बॉडी को एक बार देखने तक नहीं दिया गया।
एक पेरेंट्स जिनकी बच्ची 31 साल की उम्र में ऐसे खत्म हो जाती है, उन्हें तीन घंटे खड़ा रखा गया। उनके पेरेंट्स रोते रहे, एडमिनिस्ट्रेशन से रिक्वेस्ट करते रहे कि उन्हें अपनी बेटी को एक बार देखने दो। बट उनकी बिल्कुल नहीं सुनी गई।
तीन घंटे बाद जब फाइनली पेरेंट्स अंदर गए, तो उनकी बेटी की ऐसी हालत थी जिस हालत में कोई भी पेरेंट अपने बच्चे को नहीं देख सकता है। उनके शरीर पर कपड़े नहीं थे, चश्मा पूरी तरह से टूटा हुआ था, पूरी बॉडी पर इंजरी मार्क्स थे। शी वाज ब्लीडिंग फ्रॉम हर आईज, माउथ एंड हर प्राइवेट पार्ट्स। बॉडी ऑफ द गर्ल जिसके मुंह में खून था, बच्ची के शरीर में कोई कपड़ा नहीं था, पैर दोनों राइट एंगल में मिला गया।
मतलब बॉडी की कंडीशन ऐसी थी कि उसे देखकर कोई भी एक बार में बता सकता है कि ये कोल्ड ब्लडेड मर्डर एंड रेप केस है। लेकिन शायद हॉस्पिटल को ये सब नहीं दिख रहा था। हॉस्पिटल तो इस केस को एक सुसाइड केस बोलकर रातों-रात रफा-दफा करना चाहता था।
और इसीलिए यही कहानी का पहला लूप होल है और मेरा पहला सवाल भी:
पहला सवाल: एक क्लियर कट रेप और मर्डर केस को हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन ने सुसाइड क्यों डिक्लेयर किया?
दूसरी बात, आखिर क्यों उनके पेरेंट्स को तीन घंटों तक वेट कराया गया, बॉडी तक नहीं दिखाई गई? क्या हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन किसी को बचा रही थी या फिर अंदर एविडेंस की टैंपरिंग हो रही थी?
दूसरा सवाल: पेरेंट्स को तीन घंटे तक इंतजार कराने और बॉडी न दिखाने के पीछे क्या मकसद था?
तीसरी और इस सबसे भी ज्यादा शर्मनाक बात, उस कॉलेज के प्रिंसिपल ने बिना कोई ऑटोप्सी किए, बिना कोई प्रिलिमनरी इन्वेस्टिगेशन किए, डायरेक्टली जजमेंट पास कर दिया कि उस डॉक्टर को साइकोसिस नाम की एक मेंटल इलनेस थी और इसीलिए उन्होंने सुसाइड किया।
तीसरा सवाल: आखिर प्रिंसिपल को इतने जल्दी एक वर्डिक्ट देने की जरूरत क्या पड़ी? क्या इसमें हॉस्पिटल के और भी लोग इंवॉल्व थे जिन्हें वो बचाने की कोशिश कर रहे थे?
वेल, एटलीस्ट ये एलिगेशंस विक्टिम के पेरेंट्स हॉस्पिटल पर लगा रहे हैं क्योंकि इतना सब कुछ होने के बाद भी हॉस्पिटल ने पूरी कोशिश की कि इस केस को कैसे न कैसे करके खामोश कर दिया जाए, उसे दबा दिया जाए। लेकिन जब यह बात उसी हॉस्पिटल के बाकी डॉक्टर्स तक, बाकी स्टाफ तक पहुंची तो वो इसके खिलाफ तुरंत प्रोटेस्ट पर उतर आए। ये प्रोटेस्ट धीरे-धीरे करके ऑल ओवर इंडिया फैल गया और सोशल मीडिया पे भी ये मुद्दा एकदम से वायरल हो गया।
इसके बाद तो पोस्टमॉर्टम होना ही था और जब उसकी रिपोर्ट आई, तब यह केस और ज्यादा कॉम्प्लिकेट हो गया। पोस्टमॉर्टम ने रिवील किया कि उस डॉक्टर को बुरी तरह से सेक्सुअली असॉल्ट किया गया था। शी वाज बीटन एंड रेप्ड ब्रूटली। उनका एबडॉमन, राइट हैंड और लिप्स बुरी तरह से इंजर्ड थे, यहां तक कि उनका कॉलर बोन तक क्रश हो गया था।
सो रिपोर्ट ने क्लियर कर दिया कि यह कोई सुसाइड का केस नहीं है। और इसके बाद जब पुलिस ने इन्वेस्टिगेशन शुरू की, तो उन्हें सीसीटीवी फुटेज से पता चला कि रात को 4:00 बजे संजय रॉय नाम का एक इंसान सेमिनार हॉल में एंटर किया था। सेमिनार हॉल में पुलिस को एक ब्लूटूथ ईयरफोन भी मिला जो चेक करने पर उसके फोन से डायरेक्टली कनेक्ट हो गया। मतलब डेफिनेटली यही पर्सन कल्प्रिट है।
पुलिस ने उसे तुरंत अरेस्ट कर लिया एंड गेस व्हाट, उसने अपना क्राइम कबूल भी कर लिया।
अब ये संजय रॉय आखिर है कौन? वेल, ये पर्सन किसी भी तरीके से हॉस्पिटल से कनेक्टेड था ही नहीं। ना ही वो कोई स्टाफ मेंबर था और ना ही वो कोई मेडिकल पर्सनल था। बेसिकली 2019 से संजय कोलकाता पुलिस के साथ वेलफेयर सेल में एक सिविक वॉलंटियर की तरह काम करता था। सिविक वॉलंटियर मतलब वो लोग होते हैं जो बेसिकली पुलिस को कुछ बेसिक काम में जैसे कि ट्रैफिक मैनेजमेंट वगैरह में हेल्प करते हैं।
लेकिन इसके बावजूद रिपोर्ट्स के हिसाब से संजय अक्सर कोलकाता पुलिस का टी-शर्ट पहन के घूमता था और उसने अपने बाइक में भी कोलकाता पुलिस का प्लेट लगाया हुआ था।
चौथा सवाल: एक हॉस्पिटल में जहां किसी पेशेंट के रिलेटिव्स को भी बिना विजिटिंग आवर्स के एंट्री तक नहीं मिलती, वहां इस बंदे को रात के 4:00 बजे बिना कोई रोक-टोक के एंट्री कैसे मिल जाती है? किसी भी गवर्नमेंट हॉस्पिटल में गार्ड्स तो होते ही होंगे, उन्होंने इस बंदे को क्यों नहीं रोका?
पांचवी बात जो काफी ज्यादा फिशी है, इस पूरे इंसिडेंट की सीसीटीवी फुटेज रिलीज क्यों नहीं की जा रही है?
पांचवा सवाल: सीसीटीवी फुटेज को सार्वजनिक क्यों नहीं किया जा रहा है? क्या कुछ छुपाया जा रहा है?
नेक्स्ट क्वेश्चन, ट्विटर पर पोस्ट कर रहे हैं जहां वो दिखा रहे हैं कि क्राइम सीन से सिर्फ 20 मीटर की दूरी पर रिनोवेशन चालू कर दिया गया है और पुलिस भी वहीं बैठी हुई है। आमतौर पे तो किसी भी सीर को दूर-दूर तक सील कर दिया जाता है। तो यह जानते हुए भी कि इतना बड़ा क्राइम हुआ है, वहां पर कंस्ट्रक्शन चालू करने की परमिशन किसने दी?
छठा सवाल: क्या यह डेलिबरेटली किया जा रहा है टू डिस्ट्रॉय ऑल द एविडेंसेस? आखिर कंस्ट्रक्शन की परमिशन किसने दी?
एटलीस्ट उस हॉस्पिटल के डॉक्टर्स तो यही क्लेम कर रहे हैं।
सुन, एक और बात। संजय रॉय का ये कोई पहला क्राइम नहीं है। इस इंसिडेंट के कुछ हफ्तों पहले ही, उसके अगेंस्ट एक फीमेल डॉक्टर के साथ मिसबिहेव करने की कंप्लेंट रजिस्टर हो चुकी है। लेकिन इस पर पुलिस ने क्या किया? नो एक्शन एट ऑल।
और इस केस के पहले भी एक और औरत ने लाल बाजार पुलिस स्टेशन में ये कह के रिपोर्ट दर्ज की थी कि रॉय पिछले 3 महीने से उसे फोन करके परेशान कर रहा है, उसे हैरस कर रहा है। उस लेडी के एलिगेशन हैं कि रॉय ने पहली बार उसे मेडिसिन खरीदने के बहाने आर.जी. कर मेडिकल हॉस्पिटल में ही उस लेडी से कांटेक्ट किया था और फिर प्रिस्क्रिप्शन से उसका नंबर चुरा लिया, जिसके बाद लगातार रॉय उस पर प्रेशर डाल रहा था और धमकी दे रहा था कि वो लेडी उससे मिलने आए।
अगेन, इस पर वहां की पुलिस ने क्या एक्शन लिया? अरेस्ट के बाद संजय रॉय के फोन से पोर्नोग्राफी कंटेंट भी मिला था। एंड जब उसके नेबर्स से पूछताछ की गई, तब उन्होंने बताया कि संजय की चार बार शादी हो चुकी है और उसकी तीन वाइफ्स उसे छोड़कर चली गई थीं। उसकी अब्यूज़्ड वाइफ की डेथ हो गई थी कैंसर की वजह से।
क्या ये चीज शॉकिंग नहीं है? जब वही सेम आदमी सेम हॉस्पिटल की डॉक्टर के साथ पहले भी बदतमीजी कर चुका है, उसके ऊपर से उसका हिस्ट्री भी कुछ खास नहीं है, डोमेस्टिक वायलेंस के उसके ऊपर कई सारे एलिगेशंस लग चुके हैं, फिर भी उस पर कोई एक्शन क्यों नहीं लिया गया? क्या पुलिस एक बड़ा क्राइम होने का इंतजार कर रही थी?
सातवां और आखरी सवाल: जब इस बंदे की पास्ट हिस्ट्री क्लियर शो करती है कि वो एक सीरियल ऑफेंडर है, फिर भी वो कैसे एक सिविक वॉलंटियर बन जाता है? ऐसे गवर्नमेंट लेवल पोस्ट के लिए कोई बैकग्राउंड चेक्स नहीं होते हैं क्या?
इस पूरी कहानी में मुझे तो ये सात तार दिख रहे हैं जो बिल्कुल नहीं जुड़ रहे हैं। और इसीलिए आज पूरा देश देखना चाहता है कि अब इस केस में किसे बचाने की कोशिश की जा रही है? क्या इसके पीछे कोई स्ट्रॉन्ग पॉलिटिकल या ब्यूरोक्रेटिक बैकिंग है? क्या संजय को एक स्केपगोट बना के, बलि का बकरा बना के पुलिस के हवाले करके बाकी रेपिस्ट को बचाया जा रहा है?
आफ्टर ऑल, अभी रिसेंट रिपोर्ट्स में सामने आ रहा है कि जिस ब्रूटालिटी से उस डॉक्टर को मारा गया, ये क्राइम कोई एक जन की बात नहीं है। दिस इज अ केस ऑफ गैंग रेप। तो फिर मेरा सवाल है कि बाकी रेपिस्ट कहां हैं? क्या वो आज भी खुले घूम रहे हैं?
और आखिर में, जब भी ऐसा कोई भी क्राइम होता है तो हमारी सोसाइटी के कुछ लोग अनफॉर्चूनेटली विक्टिम को ही शेम करने लग जाते हैं, उन्हें गलत ठहराने लग जाते हैं। कितनी शर्मिंदगी की बात है कि निर्भया केस में मैक्सिमम लोगों का पहला रिस्पांस था कि वो लड़की आखिर देर रात तक बाहर थी ही क्यों। लड़की ने कैसे कपड़े पहने थे, लड़की कैसे बात कर रही थी। यह सब बोलना बहुत आसान है, लेकिन अब उन लोगों से मेरा सवाल है कि इस केस का क्या? इसमें तो वो लड़की अपने हॉस्पिटल में सिर्फ अपना काम कर रही थी।
असली प्रॉब्लम ना किसी के लेट बाहर जाने में है, ना किसी के कपड़े पहनने में है। प्रॉब्लम है तो संजय रॉय जैसे लोगों में, उनकी सोच में और हमारी सोच में। याद रखना, जब भी आप किसी भी हादसे में सीधे लड़की पे आरोप लगाते हो, आप देश के ऐसे क्रिमिनल्स को एक खुली छूट दे रहे हो दोबारा से ऐसा ही एक हीनियस क्राइम करने के लिए। उन्हें हिम्मत दे देते हो दोबारा से किसी लड़की को छेड़ने के लिए, उसे असॉल्ट करने के लिए।
इसलिए इस बार नहीं। इस बार हमें सिर्फ कैंडल मार्च करके शांत नहीं हो जाना है। निर्भया के कातिलों को सात सालों बाद सजा हुई थी, जब सब ये जानते थे कि उन्होंने ही क्राइम किया है। ये हमारे देश के लिए लिटरली हंसने वाली बात है। लेकिन इस बार नहीं। मैं फिर से आप सबसे रिक्वेस्ट करती हूं कि इस मामले को जितना हो सके फैलाएं, सोशल मीडिया पर शेयर करें, अथॉरिटीज को टैग करें, ताकि इस बार तो एटलीस्ट उनके परिवार को और इस देश को जल्दी न्याय मिल सके।
जय हिंद।
https://bollywoodtopindia.blogspot.com/2024/12/intro-to-black-biz-schools.html
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